लोन चुकाने की नहीं हिम्मत तो डिफाल्टर होने से पहले जाने आरबीआई का यह खास नियम!

देश में अब ज्यादातर ख़र्चे लोन, ईएमआई तथा क्रेडिट कार्ड से ही पूरे किए जाते हैं जिसमें लोग अपनी बड़ी जरूरत तो जैसे कार खरीदने, घर बनाने या खरीदने और ट्रैवल, बच्चों की शिक्षा आदि के लिए लोन ले लेते हैं लेकिन कई बार ऐसा होता है कि यह बड़े लोन का भुगतान नहीं हो पता है और ऐसे में लोगों डिफाल्टर होने का डर सताता है। 

वही आरबीआई का एक नियम ऐसा भी है जहां पर आप डिफाल्टर होने से बच सकते हैं लेकिन इस नियम का पालन करने के लिए आपको आरबीआई की गाइडलाइंस को पढ़ना होगा।

आरबीआई के नियम से वक्त रहते डिफाल्टर होने से बच सकता है ग्राहक!

भारत में सिबिल ( CIBIL) यानि क्रेडिट इनफॉरमेशन ब्यूरो इंडिया लिमिटेड क्रेडिट कार्ड और लोन से किए जाने वाले खर्च पर नजर रखता है। ‌ साल 2022 में सिविल द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि बैंक अकाउंट होल्डर अब ज्यादातर लोन और क्रेडिट कार्ड से ही खर्च करते हैं।‌

कई लोग बड़ी-बड़ी लग्जरी जैसे गाड़ी लोन होम लोन और पर्सनल लोन को ले तो लेते हैं लेकिन इसे चुका नहीं पाए जिसके बाद उन्हें डिफाल्टर होने का डर सताता है लेकिन आरबीआई का “रिस्ट्रक्चर लोन नियम”ग्राहक को समय पर डिफाल्टर होने से बचा सकता है और लोन की पूरी राशि या ईएमआई को भी आधा कर सकता है।

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आरबीआई रिस्ट्रक्चरल लोन नियम से डिफाल्टर होने से बचा जा सकता है

आरबीआई का कहना है कि यदि कोई ग्राहक अपने द्वारा ले गई किसी भी लग्जरियस लोन को भुगतान करने के लिए असमर्थ है तो वह अपने लोन को रिस्ट्रक्चर कर सकता है जिसकी मदद से लोन की राशि आदि हो सकती है और बाकी राशि का भुगतान करने के लिए बैंक की ओर से लंबी अवधि तक का समय दिया जा सकता है।

उदाहरण के लिए यदि किसी की लोन राशि 20 लाख रुपए है तो रिस्ट्रक्चर लोन करवाने पर यह 10 लाख रुपए हो जाएगी इसके बाद जब रिस्ट्रक्चर लोन की प्रक्रिया शुरू होगी तो उसे समय ग्राहक को 10 लाख रुपए जमा करने होंगे तथा बाकी बचे 10 लाख रुपए लंबी अवधि के लिए धीरे-धीरे चुकाने का मौका दिया जाएगा। आरबीआई के इस नियम से ग्राहक को काफी राहत मिलती है क्योंकि वह समय पर अपनी आर्थिक स्थिति को सुधार सकता है और इसके साथ लंबी अवधि में धीरे-धीरे लोन भी चुकता कर सकता है।

डिफॉल्टर टैग लगने के कारण सिबिल पर पड़ता है बुरा असर

यदि किसी व्यक्ति पर टाइम पर लोन का भुगतान न करने पर डिफाल्टर का टैग लग जाता है तो यह उसके सिविल पर बहुत बुरा असर डालता है जिसके बाद कोई भी कंपनी ऐसे व्यक्ति को भविष्य में लोन देने से डरती है और इससे व्यक्ति के मानसिक और शारीरिक रूप से हालत काफी बिगड़ सकते हैं इसलिए यदि जरूरत ना हो तो फिजूल खर्ची ना करें और यदि अगर लोन लिया है तो उसे समय पर चुकाने की कोशिश करें।

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